जब आत्मसम्मान को व्यवस्थित तरीके से तोड़ा जाता हैहर बच्चा इस दुनिया में संभावनाओं के साथ जन्म लेता है, हीनभावना के साथ नहीं। उसे यह विश्वास सिखाया जाता है कि वह कुछ कर सकता है, और यह डर भी कि वह कभी कुछ नहीं कर पाएगा। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उसे बचपन में किस तरह का माहौल मिला। जिस प्रकार एक पौधा रोज़ पानी मिलने पर हरा-भरा होता है, उसी प्रकार बच्चे का आत्मसम्मान भी प्रेम, प्रोत्साहन और सम्मान से विकसित होता है। लेकिन यदि उसी पौधे को रोज़ जड़ से काटा जाए, उसकी शाखाएँ