(रात का गहरा सन्नाटा… चारों ओर बस पेड़ों की सरसराहट, चाँद की हल्की रौशनी, और झींगुरों की आवाज़ें। सिमरन निकल पड़ी अपने पति को ढूंढने। )“सिमरन को नहीं पता था कि वो जिस राह पर निकली है, वहाँ वापसी का कोई रास्ता नहीं।वो बस एक ही चीज़ जानती थी — करण को ढूँढना है… चाहे जान चली जाए।”(सिमरन लाल साड़ी पहने किसी सुहागन की तरह जंगल के बीच चल रही है। उसके कदमों की आहट सूखे पत्तों पर गूंज रही है। हवा ठंडी है, पर उसके माथे पर पसीना है।)सिमरन (धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए) बोली - “करण जी… कहाँ चले गए आप?आपने