50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 17

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(अस्पताल के उस वीआईपी वार्ड में सन्नाटा इतना गहरा है कि केवल केबिन की घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही है। बाहर बारिश फिर से शुरू हो चुकी है, जो खिड़की पर जोर-जोर से थपथपा रही है। आर्यन के कदम केबिन के अंदर धीमे-धीमे पड़ रहे हैं।)आर्यन की नज़रें मेज पर रखी उस बंदूक और आयशा की तस्वीर के बीच झूल रही थीं। तस्वीर के नीचे लिखा वह वाक्य—"तुम्हारी बेटी, मेरी आखिरी मोहरा"—आर्यन की नसों में बिजली की तरह दौड़ गया। उसे अब डर नहीं लग रहा था; डर की जगह अब एक ऐसी ठंडी आग ने ले ली थी,