विकी, रिद्धि, अंजलि और कबीर... चारों थक चुके थे। थकान सिर्फ शरीर की नहीं थी, बल्कि उस डर की थी जो उनके सिर पर मंडरा रहा था।विकी अपने सिर पर दोनों हाथ रखकर घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था और वो बस ज़मीन को घूरे जा रहा था। तभी रिद्धि के दिमाग में कुछ चल रहा था। उसने अंजलि की तरफ देखा, जो डर से कांप रही थी। रिद्धि धीरे से सरकते हुए अंजलि के थोड़ा पास गई।उसने पूछा, "अंजलि... अगले राउंड में छुपने की कोई बेस्ट जगह है क्या तुम्हारे पास?"अंजलि ने बेबसी