हवेली का कमरा। बाहर अँधेरी रात है। लाल परदों से छनकर आती चाँदनी कमरे को और भी रहस्यमयी बना देती है। करण खिड़की के पास खड़ा है, उसकी आँखें खून की प्यास से लाल हो रही हैं।)"करण के मन में बस एक ही जंग चल रही थी…वो जानता था कि अगर उसने सिमरन का खून नहीं पिया, तो उसकी शैतानी शक्तियाँ कमज़ोर हो जाएँगी,पर सिमरन की मासूमियत उसकी प्यास पर बार-बार लगाम लगा रही थी।"(करण अचानक मुट्ठियाँ भींच लेता है, उसकी नज़रों में जुनून चमक उठता है।)करण (अपने आप से बड़बड़ाता हुआ) बोला - "नहीं… मुझे उसका खून पीना ही होगा…