काव्य संग्रह: मौन से महाकाल तक* *डॉ वंदना शर्मा**समर्पण* मेरे मम्मी पापा जी और मेरे बेटे श्रीश को, जिनके सहयोग और अच्छे संस्कारों से मैं आज यहां तक पहुंची। *अनुक्रम* 1. वो बचपन बहुत याद आता है 2.मायके की गलियां 3. पिता 4. मै ऐसी क्यों हूं 5. बालकनी 6.हे प्रभु 5. एक उम्र के बाद 6. बारिश कब तुम आओगी 7. उफ! ये गर्मी 8. जब भी मैं अपनी खिड़की खोलूँ -9. आओ सुनाऊँ तुम्हें एक कहानी - 10. कैसे कह दूँ महिला आज सशक्त है ===========================वो बचपन बहुत याद आता है वो मस्ती भरे दिनवो पीपल की छाँववो सखियों का साथलाल-परी-नीली परीपोशम्पा - भाई - पोशम्पाबोल मेरी मछली कितना पानीवो नन्हा-सा राजकुमारवो परियों की कहानीवो