सिवान, बिहार।सुबह के नौ बजे थे।आज शहर में security थोड़ी ज्यादा थी। कई जगह पुलिस खड़ी थी। बड़े-बड़े पोस्टर लगे थे। लोग भी समझ रहे थे कि कुछ बड़ा होने वाला है।कारण सिर्फ एक थारणविजय ठाकुर।सिवान में उसका नाम अलग तरीके से लिया जाता था।लोग कहते थे“ठाकुर साहेब।”बस।नाम सुनते ही सामने वाला समझ जाता था किसकी बात हो रही है।शहर के बाहर उसकी हवेली थी।बड़ी। पुरानी। और पूरी security में।बाहर काली SUVs खड़ी थीं। अंदर staff लगातार इधर-उधर भाग रहा था।Dining hall में रणविजय बैठा था।सफेद कुर्ता। Sleeves हल्की folded। हाथ में black watch। सामने laptop खुला था।सामने खड़े थे