अनुशासन के नाम पर बचपन का कत्लदुनिया में कुछ घाव ऐसे होते हैं जो दिखाई नहीं देते। उनसे खून नहीं बहता, उनके लिए कोई पट्टी नहीं बंधती और न ही डॉक्टर की रिपोर्ट में उनका स्पष्ट उल्लेख मिलता है। फिर भी वे इंसान को भीतर से इस कदर तोड़ देते हैं कि वह जीते-जी एक खामोश खंडहर बन जाता है। ऐसे घाव मन पर लगते हैं, और मन के घावों की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि समाज अक्सर उन्हें घाव मानने से भी इंकार कर देता है। लोग टूटे हुए हाथ-पैर को देखकर सहानुभूति जता देते हैं, लेकिन टूटी