नशा - 2

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नागरिक- पंडित जी मैं लोटा तो नहीं खरीदता मगर आप मार नहीं सकते । लोटा आपको ले जाना चाहिए। इसके छू लेने से लोटा नापाक नहीं हो गया। दर्शक बन्धु ठीक कह रहा हूँ।त्रिवेणीनाथ- दर्शकों से पूछते हो न, तो लोटा दर्शक ही ले जायँ मुझे पैसा चाहिए।नागरिक- दर्शक पैसा देंगे या नहीं यह तो मैं नहीं कह सकता, लेकिन..।पंडित- लेकिन-वेकिन कुछ नहीं। ठीक है.....मैं पैसा लेकर रहूँगा। (ऐंठते हुए चला जाता है (नागरिक लोटा उठाता है, लड़के को देता है)नागरिक- (बच्चे से) इसे ले जाकर रख दो। इस देश में न जाने कितने तरह के लोग हैं और उन पर तरह-तरह