नाटक ? तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्तों के साथ स्थानीय चटकीले रंग, संयोजन-विखण्डन, रडार छवि- संस्कृति, अतियथार्थता के बीच नाटकों का स्थान कहाँ है ? इतिहास और साहित्य का अन्त बताने वाले मानवता का भी अन्त घोषित कर चुके हैं। लोग कहते हैं यथार्थ ने कहानी का अन्त कर दिया है। यह सब वैसे ही लगता है जैसे कोई जनपद साक्षर घोषित हो जाता है पर उसमें घुरहू, निबरे के अँगूठाटेक वंशज आराम से घूमते हैं। घटनाएँ घट जाती हैं पर उनकी व्याख्याओं का अन्त नहीं होता है। वर्तमान ही भूत भविष्य को