उन्हें नींद नहीं आती पात्र- बातुलनायकमकटियारकमाण्डरमिस राव/बनजाराटोगोमोलईजगरूपमधुकरकिश्नूमटरूकुंजीलाल-------------------------------------अंक- 1(सरकारी बंगले का लान। चार कुर्सियाँ लगी हैं बगल में एक छोटी मेज पर फोन रखा है। बातुल और नायकम बात कर रहे हैं। वे कमाण्डर तथा उनके साथियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।)बातुल- समय तो हो गया।नायकम-हाँ समय तो हो गया। कमाण्डर साहब आते होंगे।बातुल- सरकार सुना है....नायकम-जो अपने सुना वह सच है। सरकार की नींद हराम हो गई है. ....बातुल- महंगाई और बेरोजगारी से उनकी नींद हराम होना.....नायकम- बात यह नहीं है। उन्हें सबसे अधिक परेशानी जन आन्दोलन को लेकर है। आदमी कुछ भी बरदाश्त नहीं करना चाहता।बातुल- लेकिन मँहगाई और बेरोजगारी होगी