आरा, बिहार।सुबह का समय था। मोहल्ले में कहीं भजन चल रहा था, कहीं दूधवाला आवाज़ लगा रहा था। सिंह राजपूत परिवार के बड़े घर में भी रोज़ की तरह हलचल शुरू हो चुकी थी।आँगन में दादी माँ चारपाई पर बैठी तुलसी में पानी डाल रही थीं। तभी अंदर से तेज आवाज़ आई“दादी! मेरी नीली साड़ी कहाँ है?!”दादी ने बिना ऊपर देखे कहा “अलमारी में होगी। हमका का पता.”दो मिनट बाद आराध्या गुस्से में बाहर आई।“मिली नहीं.”“तो दूसरी पहन ले.”“नहीं. वही पहननी है.”दादी हँस पड़ीं। “हे भगवान… तेरे अंदर बचपन से जिद कूट-कूट के भरा है.”आराध्या ने मुँह बनाया और उनके