(एक ठंडी, अंधेरी रात। हवेली के मलबे के पास रखे आयशा के पुराने सामान के बक्से को खोलने की आवाज़—लकड़ी की चरचराहट। हवा की फुसफुसाहट जो आर्यन के नाम को पुकार रही है।)आर्यन के हाथ कांप रहे थे। सामने वह दराज थी जिसे उसने कभी नहीं खोला था, यह सोचकर कि यह उसकी बेटी की निजता (privacy) है। लेकिन आज, उसी दराज के अंदर एक लिफाफा रखा था जिस पर लिखा था: "आर्यन मल्होत्रा के लिए—जब सब कुछ राख हो जाए।"सीन 1: लिफाफे का राज़आर्यन ने धीरे से लिफाफा खोला। अंदर एक पुरानी, पीली पड़ चुकी DNA रिपोर्ट थी। उसकी