गाँव की वह दोपहर और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ गवाह थीं कि आज एक रिश्ता दम तोड़ चुका था। धूल उड़ती उन गलियों में जब अयान के कदम घर से बाहर निकले, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी परछाईं नहीं, बल्कि अपनों के हाथों मिला हुआ गहरा ज़ख्म भी साथ चल रहा था।यह कहानी किसी बाहरी दुश्मन की नहीं है। यह कहानी उन दो भाइयों की है जिन्होंने मिलकर उसी हाथ को मरोड़ा जो कभी उनकी ताकत बना था। यह कहानी है उस अयान की, जिसके जिस्म पर लगी चोटों का नीला निशान शायद मिट जाए, लेकिन उसकी रूह पर