एपिसोड 4: आख़िरी हिसाब और न्याय की गूंज अमन ने बहुत धीरे से पैर आगे बढ़ाए और कमरे का मुख्य दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। कुंडी गिरने की आवाज़ ज़ोया के कानों में किसी मौत की घंटी जैसी गूंजी। कमरे की लाल रोशनी में अमन का चेहरा किसी हैवान जैसा लग रहा था।"मैंने कबीर को बहुत समझाया था ज़ोया, कि वो हमारे बीच में न आए," अमन ने चाकू की धार को अपनी उंगली से सहलाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक डरावना सुकून था। "लेकिन वो नहीं माना। वो मेरी अलमारी तक पहुँच गया था, बिल्कुल तुम्हारी तरह। अब