(एक अजीब सी गूँज, जैसे हज़ारों लोग एक साथ फुसफुसा रहे हों। आईने के कमरों में टकराती हुई आर्यन की अपनी ही चीखें। हर तरफ से आ रही 'हंसने' की आवाज़ें जो किसी डरावने मेले का एहसास दिला रही हैं।)आर्यन उस कमरे में अकेला था, जहाँ चारों तरफ सिर्फ आईने ही आईने थे। हज़ारों 'आर्यन' उसे घूर रहे थे। कोई आर्यन रो रहा था, कोई मुस्कुरा रहा था, तो कोई क्रूरता से उसे ललकार रहा था। यह कोई काल्पनिक जगह नहीं थी, यह आर्यन के उस मन की गहराई थी जिसे उसने दशकों तक 'सफलता' के मुखौटों के नीचे छिपा