50 दिन का सन्नाटा - एपिसोड 8

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(एक धीमा, सुरीला लेकिन डरावना संगीत। पक्षियों के चहकने की आवाज़, जो बहुत ही कृत्रिम (artificial) लग रही है। आर्यन के नंगे पैरों के घास पर चलने की दबी हुई आवाज़।)आर्यन उस बगीचे की ओर बढ़ रहा था। उसे लगा कि वह अपनी 'हवेली' के उस मलबे से बाहर निकल आया है, लेकिन बगीचे की घास उसके पैरों को चुभ नहीं रही थी, बल्कि वह रेशम जैसी मुलायम थी। आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा—वह सफेद कमरा, जहाँ वह लेटा था, अब पूरी तरह से गायब हो चुका था। वहाँ कोई दीवार नहीं थी, कोई दरवाज़ा नहीं था, सिर्फ वह बगीचा