एपिसोड 3: डायरी का कड़वा सच और अलमारी का राज़ कबीर की मौत को तीन दिन बीत चुके थे। पहाड़ी शहर पर अब भी कोहरे का साया मंडरा रहा था। अमन हर वक़्त ज़ोया के साथ साये की तरह रहता था। ज़ोया का रो-रोकर बुरा हाल था, और अमन इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उसे यह यकीन दिलाने में लगा था कि अब इस दुनिया में उसका ख्याल रखने वाला सिर्फ वही बचा है।"ज़ोया, तुम इस कॉटेज में अकेली सुरक्षित नहीं हो," अमन ने बहुत ही प्यार से ज़ोया का हाथ थामते हुए कहा। "तुम्हें मेरे घर शिफ्ट हो जाना चाहिए।