शिवपुर की रातें अब पहले जैसी नहीं रहीं थीं।पहले अंधेरा सिर्फ डर लाता था।अब अंधेरा इंतज़ार लाता था।लोग रात को दरवाज़े बंद करने से पहले सड़कें देखते थे…जैसे कहीं कोई काली बाइक अचानक मोड़ से निकल न आए।आजम बाजार की दुकानों पर फिर भीड़ आने लगी थी…लेकिन हँसी गायब थी।हर बातचीत धीरे आवाज़ में होती।और हर बातचीत का अंत एक ही नाम पर जाकर रुकता—अर्नब।कुछ लोग कहते वो शैतान है।कुछ कहते वो शहर साफ कर रहा है।लेकिन सच ये था—किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वो आखिर चाहता क्या है।और यही चीज़ उसे बाकी गुंडों से अलग बनाती