”शिवपुर अब सोता नहीं था।रात होते ही सड़कें खाली हो जातीं।दुकानें जल्दी बंद होने लगी थीं।लोग कहते थे—“अंधेरा होने से पहले घर पहुँच जाओ…”क्योंकि अब शहर में सिर्फ गैंग का डर नहीं था।अब एक नाम का डर था।अर्नब।लेकिन जितना शहर उससे डर रहा था…उतनी ही तेजी से कुछ लोग उसे पसंद भी करने लगे थे।आजम बाजार में पहली बार वसूली बंद हुई थी।लाल पुल इलाके में नशे के कई अड्डे खाली पड़े थे।छोटे गुंडे या तो शहर छोड़ रहे थे…या किसी नए सहारे की तलाश में थे।और यही चीज़ सबसे ज्यादा खतरनाक थी।क्योंकि डर जब उम्मीद बनने लगे…तब आदमी राजा