शुभिका बिल्कुल चुप बैठी थी। उसके हाथों पर हल्दी लगाई जा रही थी…और सामने सोफे पर विक्रांत शर्मा बैठा उसे लगातार देख रहा था।उसकी आँखों में अजीब सा पागलपन था। जैसे उसे दुनिया की किसी चीज़ की परवाह ना हो…सिवाय शुभिका के। और यही बात शुभिका को सबसे ज्यादा डराती थी।ढोलक की आवाज़… रिश्तेदारों की हँसी…सब कुछ धुंधला पड़ चुका था उसके लिए। उसे बस विक्रांत की वो आँखें दिख रही थीं।अचानक उसकी आँखों से एक आँसू गिरा।उसने मन ही मन कहा—काश… उस meeting में मैं कभी गई ही ना होती…━━━━━━━━━━━━━━━कुछ महीने पहले…━━━━━━━━━━━━━━━सुबह का समय। शुभिका अपने office cabin में