चेतना का कत्लेआमभाग एक: शून्यता का गर्भाशयजैसे ही वह' ठक' की आखिरी आवाज हुई, सारा शोर थम गया. न टाइपराइटर की गूँज थी, न अस्पताल की स्मेल. मैं एक ऐसी जगह था जिसे' मार्जिन' कहा जा सकता है—सफेद कागज का वह कोना जहाँ लेखक कभी नहीं लिखता. यहाँ न रौशनी थी, न अंधेरा.मेरे सामने एक विशाल' कर्सर' (Cursor) लटक रहा था, जो किसी खूनी तलवार की तरह धक- धक कर रहा था. हर बार जब वह चमकता, मेरी यादों का एक हिस्सा मिट जाता.तुम्हें क्या लगा इकबाल, कि तुम पाठक के कमरे में जाकर सुरक्षित हो जाओगे?वह आवाज. वह मुस्कान