एक अधूरी मां - 5

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 राख से जन्मी ममताअपने नन्हे कलेजे के टुकड़े को खोने के बाद राधा के लिए दिन और रात एक समान हो गए थे। वह कमरे के एक कोने में बैठी रहती, उसकी आँखों के आंसू अब सूख चुके थे और उनकी जगह एक पथरीली खामोशी ने ले ली थी। उसे न भूख लगती थी, न प्यास। उसे लगता था कि शायद उसकी ज़िंदगी का मकसद उसी छोटे से कफन के साथ दफन हो गया है।लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।सूरज ने इस बार हार नहीं मानी। वह जो कभी बात-बात पर झुंझला जाता था, अब राधा की परछाईं