एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जोरदार कहानी है। इसको समझना आपने है....एक लकीर.... कितना कुछ कर जाती है। हद भी बन जाती है। लकीर बड़ी न खुशग्वार कह सकते है। ये एक लकीर की कहानी है.... भारत सोने की चिड़िया थी, अब चादी की भी नहीं रही। कितना कुछ समेटा हुआ है इस भारत मुल्क ने.... पिछले ज़ख्म