"रात का गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ तेज़ बारिश और बिजली की कड़क तोड़ रही थी। 8 साल की छोटी आन्या अपने रास्ते से भटक कर घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थी। उसके नन्हे पाँव कीचड़ में फँस रहे थे और डर के मारे उसकी हिचकियाँ बंध गई थीं। वह बार-बार अपनी माँ को पुकार रही थी, पर सिर्फ हवाओं की सरसराहट सुनाई देती।तभी, एक झाड़ी के पीछे से किसी के ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने की भारी आवाज़ आई। आन्या का कलेजा मुँह को आ गया। उसने डरते हाथों से झाड़ियों को हटाया और जो देखा वह उसकी सोच से