घर पर कबीर के माता-पिता के अलावा उसकी दो बुआ, मीना और सुमन भी आई हुई थीं। सुमन बुआ अपने दोनों बेटों यानी कबीर के फुफेरे भाइयों (जतिन और तरुण) को भी साथ लाई थीं। कबीर ने अंदर जाकर सभी के पैर छुए और नमस्ते किया।खाना पहले ही परोसा जा चुका था, और ऐसा लग रहा था जैसे सभी सिर्फ उसी का इंतज़ार कर रहे थे। कबीर भाँप गया कि दाल में कुछ काला है। उसने अपने माता-पिता के चेहरों पर छाई चिंता और बुआ की अजीब सी नज़रों को देखा, तो वह सोचने लगा कि आखिर माजरा क्या है।वहां