। । वीर को प्रकाश अंकल की कल की कही हुई बात याद आ जाती है , कि दुनिया तुम्हें तभी देखती है जब तुम सफल हो जाते हो और तुम्हारी सफलता की सराहना भी करती है । लेकिन सफल होने के लिए तुम जो परिश्रम करते हो , उसे कभी नहीं देखती और वीर यही बात सोच कर अब से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के बारे में सोच रहा था , जैसा वह अपने पिता के जाने से पहले किया करता था । इसीलिए वह अभी पढ़ रहा था ।वीर का दिमाग वैसे तो बहुत तेज था लेकिन