डबल स्टैंडर्ड

शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह सोफे पर बैठीं अपनी ब्याहता बेटी, चित्रा, से फोन पर बात कर रही थीं। किचन से मसालों की बड़ी ही अच्छी खुशबू आ रही थी और प्रेशर कुकर की सीटी के बीच मीरा जी की आवाज साफ और सख्त सुनाई दे रही थी। उनकी बहू, सिया, किचन में रात के खाने की तैयारी कर रही थी। जैसे ही मीरा जी ने अपनी आवाज थोड़ी नीची की, सिया के कान चौकन्ने हो गए... मीरा जी की फुसफुसाहट उसे साफ़ सुनाई दे रही थी।"देख चित्रा, मेरी