अंश, कार्तिक, आर्यन - 13

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बाल सुधार गृह से निकलने के बाद भी रणजीत ने कभी गलत रास्ते पर चलने के बारे में नहीं सोचा था।उसके अंदर अब भी कहीं न कहीं उसकी माँ की कही बातें आभी भी उसके लिए सच थी।वो शब्द,जीने   बचपन में उसने सैकड़ों बार सुनी थी—“ बेटा ईमानदारी से जीना… किसी का हक मत छीनना… मेहनत की कमाई ही सुकून की रोटी देती है। पर उस एक रात ने उसका  उससे सब कुछ छीन लिया था,लेकिन उसकी माँ की सीख अब भी उसके भीतर बची हुई थी।जब वह बाल सुधार गृह से बाहर निकला तो उसके पास न घर था,न