मेरा बच्चा... लौटा दो...

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         वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीकुंवर महेंद्र प्रताप सिंह इलाके़ के नामी रईस थे। उनकी पहुंच कुमाऊं के कमिश्नर तक थी। उनकी पत्नी इंद्राणी विवाह कर उनके घर आईं तो अपने साथ चांदी की मां लक्ष्मी की मूर्ती भी लाईं थी। घर में कुल देवता की पूजा का रिवाज था पर कुंवर साहब ने कभी पत्नी की आस्था पर प्रश्न नहीं किया। विवाह के पन्द्रह वर्ष बाद इंद्राणी तपेदिक से पीड़ित हो गई थी। वैधो और हकीमो ने एक स्वर में कहा- "मैदान की हवा अब नहीं बचाएगी, पहाड़ पर ले जाइए।" उन्होंने कमिश्नर से कहकर रेस्ट हाउस एलाट कराया। पत्थर की दीवारों