गिरिडीह में रविंद्रनाथ टैगोर ।

  • 765
  • 195

पारसनाथ की छाया में गिरिडीह : रवीन्द्रनाथ, “एकला चलो रे” और एक सांस्कृतिक भूगोलछोटानागपुर का पठारी प्रदेश भारतीय भूगोल का केवल एक प्राकृतिक विस्तार नहीं है,यह भारतीय सभ्यता के उन शांत प्रदेशों में से एक है जहाँ प्रकृति और मनुष्य के बीच का संबंध आज भी किसी प्राचीन संवाद की तरह जीवित प्रतीत होता है। झारखण्ड का गिरिडीह जिला इसी संवाद का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ की पहाड़ियाँ, साल के वन, लाल मिट्टी, चट्टानी धरातल, बरसाती नदियाँ और पारसनाथ का विराट पर्वत-ये सब मिलकर केवल एक भौगोलिक परिदृश्य नहीं रचते, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक भूमि का निर्माण करते