Episode -10 (अचानक से) प्रिया, रिया को वह रहस्यमयी खत देकर कमरे से बाहर निकल चुकी थी। उधर मंडप में सन्नाटा था, जिसे पंडित जी की भारी आवाज़ ने तोड़ा।"मुहूर्त का समय निकला जा रहा है, कन्या को शीघ्र बुलाइए!" पंडित जी के माथे पर चिंता की लकीरें थीं। उनकी बात सुनकर रिया के पिता, मिस्टर दीक्षित, थोड़े असहज हो गए। उन्होंने अपनी पत्नी की ओर देखते हुए हड़बड़ी में कहा, "जाओ, जल्दी से रिया को लेकर आओ, शुभ मुहूर्त बीता जा रहा है।"रिया की माँ कमरे की ओर बढ़ीं, जहाँ रास्ते में उन्हें प्रिया खड़ी दिखी। उन्होंने इशारों में प्रिया