एक अधूरी मां - 1

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राधा का बचपन किसी धुंधली सुबह जैसा था, जहाँ रोशनी तो थी पर गर्माहट नहीं। सात भाई-बहनों के उस बड़े और गरीब परिवार में राधा तीसरे नंबर पर थी। उसका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि चूल्हे की आग और घर के कामों में बीता। राधा बाकी बहनों से अलग थी—शांत और सहमी हुई। उसके हाथ में हमेशा एक पुराना सा तावीज़ बंधा रहता, जो उसकी माँ ने उसे "उन सायों" से बचाने के लिए पहनाया था जो राधा के बचपन से ही उसके इर्द-गिर्द मंडराते रहते थे। राधा को हमेशा लगता कि कोई अदृश्य दुख उसका पीछा कर रहा है।जब