एक छोटा लड़का हर साल अपने जन्मदिन पर एक ही सवाल पूछता था,“माँ, पापा इस बार आएँगे ना?”माँ हर बार मुस्कुराकर कहती,“हाँ बेटा, ज़रूर आएँगे।”उसके पापा शहर में नौकरी करते थे।घर की हालत खराब थी, इसलिए सालों से गाँव नहीं आ पाए थे।उस दिन लड़के का दसवाँ जन्मदिन था।उसने पूरे दिन दरवाज़े पर बैठकर इंतज़ार किया।शाम हो गई… रात भी हो गई…लेकिन पापा नहीं आए।लड़का उदास होकर सो गया।रात देर से दरवाज़ा खटखटाया।माँ दौड़कर बाहर गई।दरवाज़े पर एक आदमी खड़ा था, हाथ में छोटा-सा केक और एक पुराना बैग।“बहन… ये बैग तुम्हारे पति का है।फैक्ट्री में हादसा हो गया…”माँ के