रोनी की बात सुनकर बाकी लड़के एक-दूसरे को देख कर हंसने लगे। क्लास में हो रहे इस शोर और मज़ाक के बीच तभी टीचर अंदर आए। टीचर के आते ही सब शांत होकर अपनी सीटों पर बैठ गए, लेकिन उन हंसी के तीरों ने विक्रम के दिल को छलनी कर दिया था।दोपहर के लंच की घंटी बजी। कैंटीन की तरफ भागते बच्चों के शोर के बीच विक्रम अपनी बेंच पर ही बैठा रहा। उसने अपना टिफिन खोला, लेकिन फिर उसे बंद कर दिया। उसके मन में एक कड़वा विचार आया— "अगर मैं ज्यादा खाऊँगा, तो और लंबा-चौड़ा हो जाऊँगा... फिर