Devil की दास्तान - 7

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(शाम का समय। ऑफिस का कमरा सुनसान। सिमरन अपने डेस्क पर बैठी है। बाहर हल्की धूप और कमरे में अंधेरा मिश्रित।)"करण की प्यास बढ़ रही थी।सिमरन अब भी उसकी असली ताक़त और लाल आँखों की प्यास से अनजान थी।लेकिन उसे रोकना मुश्किल था। उसे पास लाना ही पड़ता था।"(करण धीरे-धीरे सिमरन के पास आता है। उसकी आँखें लाल, चेहरा गंभीर।)Karan (धीमे स्वर में) बोला - "तुम आज देर तक अकेलीकाम कर रही हो।ये खतरनाक हो सकता है।मैं तुम्हें सुरक्षित करना चाहता हूँ।"(सिमरन काँपती है। मासूमियत और डर के मिश्रित स्वर में फुसफुसाती है)Simran बोली - "सुरक्षित... आपसे? मुझे डर लग रहा है..."(करण