(सावधान: इस अध्याय को पढते समय अपने पीछे का दरवाजा बंद कर लें, क्योंकि इस कहानी के शब्द आपके कमरे के सन्नाटे से बातें करेंगे। )शांति निवास' का वह गलियारा अब गलियारा नहीं रहा था. वह एक खिंचती हुई रबर की तरह लंबा होता जा रहा था. मैं भाग रहा था, पर मेरे पैर एक ही जगह पर जम गए थे. इसे मनोविज्ञान में' स्लीप पैरालिसिस' का भ्रम कहते हैं, जहाँ आपका दिमाग भागना चाहता है पर शरीर साथ नहीं देता. पर मेरे साथ यह हकीकत में हो रहा था. दीवारों पर जमी सीलन अब आकृतियाँ बदलने लगी थी—कभी वह