नाटक का नाम: “पढ़ही त बढ़ही – बिटिया के सपना” ️ विषय: नारी शिक्षा, जागरूकता, समाज परिवर्तन पात्र: सुनीता – पढ़ाई के लिए उत्सुक लड़की रामू – सुनीता के पिता (पुरानी सोच) सीता – सुनीता की माँ (समझदार) मास्टर जी – स्कूल शिक्षक गांव के सरपंच दो-तीन ग्रामीण (पुरुष/महिला) दृश्य 1 – (घर के आंगन में) (सुनीता किताब लेकर बैठी है) सुनीता: माँ, मोला स्कूल जाए के मन करत हे। मोर संगवारी मन सब पढ़े जाथें, मंय काबर नई जा सकत हंव? रामू (गुस्सा में): लइकी मन पढ़-लिख के का करहीं? तोला घर-गिरस्ती सिखे के