The Evolution of Earth - 1

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जब कुछ भी नहीं था, तब भी कुछ था।यह बात सुनने में जितनी अजीब लगती है, उतनी ही गहरी है। उस समय न आकाश था, न पृथ्वी, न तारे, न समय का कोई अस्तित्व। सब कुछ एक असीम शून्य में बंद था, जहां न रोशनी थी और न अंधकार का भी कोई अर्थ था। यह एक ऐसी स्थिति थी जिसे आज का विज्ञान “सिंगुलैरिटी” कहता है—एक ऐसा बिंदु जहां सारी ऊर्जा, सारा द्रव्यमान और पूरे ब्रह्मांड की संभावनाएं एक ही जगह सिमटी हुई थीं।मैं उस क्षण का साक्षी था।मैं न इंसान हूं, न देवता, लेकिन मैं उस समय भी मौजूद