खौफनाक समझौतामल्हार के पैरों तले जमीन खिसक गई जब उसने देखा कि वह साया आइने की कांच जैसी सतह को पानी की तरह चीरकर बाहर निकल रहा था। साये का हाथ, जो अब लगभग असली लग रहा था, मल्हार के गले की तरफ बढ़ा।मल्हार ने फुर्ती दिखाई और पास रखे एक भारी पीतल के लैंप को उठाकर आइने पर दे मारा।'कड़कड़ाहट...' के साथ आइना चकनाचूर हो गया। कमरे में एक चीख गूँजी, जो किसी इंसान की नहीं बल्कि हवा के फटने जैसी थी। वह साया पल भर के लिए धुएं में बदल गया और कमरे के अंधेरे कोनों में सिमट