Episode -8 (अतीत की अनकही यादें) रिया के मन में द्वंद्व चल रहा था। "क्या सच में रूहें होती हैं? मैं तो इन सब पर विश्वास नहीं करती।" वह खुद से ही तर्क-वितर्क कर रही थी, पर एक बात उसे भीतर ही भीतर काट रही थी—आखिर उसे हुआ क्या है? उसे सच जानना था। वह धीरे से बेड से उतरी। पैर की चोट के कारण उसे चलने में असहनीय पीड़ा हो रही थी, पर सच जानने की तड़प उस शारीरिक दर्द से कहीं बड़ी थी। दीवारों का सहारा लेते हुए वह लड़खड़ाते कदमों से कमरे के बाहर आई।