गांव का सफर !!

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ये कहानी जो गाँव की यादें, अद्भुत एहसास से जुड़ी है। गाँव, वो गाँव जिस भूमि पर हमारे खानदान की यादें और हमारा बचपन गुजरा था। दादा, दादी की यादें नहीं हैं परंतु उनकी चर्चा गाँव के दूर-दूर तक फैली है। दरअसल दादा जी गाँव के मठ के पुजारी थे, वहाँ लोग दूर-दूर से इलाज के लिए आया करते। जब भी मैं गाँव में जाती हूँ अपने दादा जी से मिलने मठ पर जरूर जाती हूँ उनकी तस्वीर देखकर कहानी बताई गई अंदाज़ा लगा लेती हूँ। बहुत गर्व महसूस होता है।गाँव में जाने से वो अपनापन महसूस होना, वो बच्चे