पुरस्कारकमल चोपड़ासदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका, "अरे, सदानंद! आज तुम काम पर जा रहे हो? पता है आज हमारे गाँव दीनेपुर में सच्चिदानंदजी महाराज आ रहे हैं। लोग उनके दर्शन मात्र को तरसते हैं और तुम...? अरे, चलो आज तुम भी महाराज के दर्शन कर लो..."सदानंद ने सोचा, काम तो लगे ही रहते हैं। चलो, आज मैं भी कुछ ज्ञान प्राप्त कर लूँ। वह भी उनके साथ हो लिया।एक भव्य