कहानी-शेष सबंध बरसों बाद विशाखा मायके जाने के लिए अकेली ट्रेन का सफर कर रही थी। अपनी वर्थ खोल कर वह इत्मीनान से लेट गयी। कुछ ही देर हुई थी कि सहसा लगा किचन में कुछ खुला रह गया,शायद सिंक का नल बह रहा था।वह हड़बड़ी में उठी और वर्थ से नीचे उतरते तक भूली ही रही कि वह इस वक्त किचन में नहीं चलती ट्रेन में है। उसके मुँह पर मुस्कुराहट फैल गयी। उसने मन ही मन खुद से कहा-क्या जिन्दगी हो गयी है मेरी! वाश रूम से लौट कर अपनी वर्थ पर फिर से लेटने तक वह