कुछ दिन बाद — ऑफिस।श्राव्या वापस आ चुकी है, लेकिन पहले जैसी नहीं है। वो हर छोटी आवाज़ पर चौंक जाती है। कभी अचानक पीछे मुड़कर देखती है, कभी खाली कुर्सियों को घूरती रहती है। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड पर कांप रही हैं।श्राव्या (धीरे से, खुद से) बोली - वो... अब भी यहीं है... मुझे महसूस होता है...अचानक पीछे से कोई फाइल गिरती है — श्राव्या घबरा जाती है और कुर्सी से उठ जाती है। तभी कृषांत वहाँ आता है। वो तुरंत श्राव्या के पास जाता है।कृषांत (नरमी से) बोला - श्राव्या… रिलैक्स… कुछ नहीं है यहाँ।श्राव्या डर के मारे सीधे उसके पास