जिंदगी की दूसरे किनारा - 8

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जिंदगी के दूसरे किनारा पाठ 8और अब कुछ समय बादवह अपने बिस्तर पर रोते हुएवह नॉर्मल होकर अपने आगे की तरफ देखते हुए और बहुत देर तक वैसे ही उदासीपन से बैठी है और फिर कुछ देर बाद अपने पलके झपकाते हुए वह खुद को संभालते हुए होश में आती है और अचानक मूर्ति हुएऔर फिर अपने बिस्तर पर रखे हुए लैपटॉप को अपने हाथ बढ़ाते हुए  अपने हाथों में लेते उठाकर आगे लाते हुए अपनी पीठ और सर को झुकते हुए  लैपटॉप की तरफ झुक जाती हैऔर दोनों हाथ लगाते हुए लैपटॉप की कीबोर्ड पर कुछ सर्च करने लगता है मेघना अब तिलक अपनी सेविंग के पैसे खर्च कर रही