पुस्तक समीक्षा - इलाहाबाद पैसेंजर

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युवाओं के सपनों के शहर का आईना है - “इलाहाबाद पैसेंजर “​​ लगभग उन्हीं दिनों (वर्ष 2026) में यह पुस्तक छप कर सामने आई है जिन दिनों में वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया का उपन्यास “जीते जी इलाहाबाद” को साहित्य अकादमी अवार्ड मिला है और उसको लेकर साहित्य जगत में भिन्न - भिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं | इलाहाबाद की साहित्यिक - सामाजिक चर्चा हो और उस पर भिन्न भिन्न प्रतिक्रियाएं सामने ना आएं यह हो ही नहीं सकता है | इलाहाबाद वैचारिक समर भूमि रहा है और इसीलिए उसकी अलग पहचान बनी हुई है |                  लेखक श्री संजीव रॉय इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं|छात्र जीवन को उन्होंने