मंजिले - भाग 45

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 ------------------------मंजिले कहानी सगरहे कि सब से सुंदर क्लाकृति मेरी यही कहानी जुर्म ही बड़ी खास चर्चित है। पता कयो ये सच्ची कहानी है एक दम रीड की हडी की तरा "------- ताजुब है न। "                               (जुर्म )      सुबह की वही छटपटाट वही हर रोज की तरा दुपहर तक बिज़ी घर घर की कहानी.... कही पर चीख कही हसने की आवाजे कही मदहोशी की चुस्की चाये की, बनारस के शहर मे मंदिरो की घंटिया वजने के चल चित्र.. हर कोई आपनी लीला मे डूबा हुआ