चलो दूर कहीं... 12पश्चिम क्षितिज पर सुरज, किसी नई नवेली दुल्हन के घूंघट की भांति सरक रहा था.. जिससे क्षितिज में रक्तांबर आभा फैली हुई थी। गोधूलि बेला में जंगल में जैसे अफरातफरी मची हुई थी... पक्षियों के कलरव से वातावरण गुंजायमान हो रहा था और स्वच्छ नीले आसमान में अठखेलियां करते पक्षियों के झुंड की अदभुत तस्वीरें बन और बिगड़ रही थी..उन तस्वीरों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे किसी कुशल ट्रेनर के देख रेख में एक लय में डुबते सुर्य को सलामी दी जा रही है..! जंगली पशुओं का झुंड आपस में लड़ते झगड़ते धूल