भाग 6: पूर्णिमा का संस्कारपूर्णिमा की रात थी और चाँदनी ने वर्मा हवेली के बरामदे को चांदी जैसा चमकदार बना दिया था। बूढ़े देवेंद्र वर्मा ने तेजी से काम किया था, पच्चीस लोग इकट्ठे हो चुके थे, सभी वर्मा परिवार के सदस्य जो चंद्रनगर और आसपास के गाँवों में रहते थे। कुछ युवा थे, कुछ बूढ़े, सभी के चेहरे पर उत्सुकता और डर का मिश्रण था।आर्यन बरामदे के एक कोने में खड़ा था, मृया उसके बगल में। उसने देखा कि मृया की आकृति आज और भी स्पष्ट थी, अब वह पूरी तरह से मानव दिख रही थी, सिवाय उस हल्की